खतरनाकपुर :- राजनीति में कहा जाता है कि कोई स्थायी दुश्मन नहीं होता, लेकिन खतरनाकपुर नगर पालिका में यह ‘दोस्ती’ अब कांग्रेस के निष्ठावान कार्यकर्ताओं के गले की फांस बन गई है। शहर में चर्चा आम है कि नगर पालिका में विकास का बहाना लेकर भाजपा और कांग्रेस के पार्षदों के बीच एक ऐसा ‘गुप्त गठबंधन’ तैयार हुआ है, जिसने पार्टी की विचारधारा को ताक पर रख दिया है।
विकास का ‘बहाना’ या कुर्सी का ‘नजराना’?
नगर पालिका में कांग्रेस के अध्यक्ष हैं, जबकि प्रदेश में भाजपा की सरकार कायदे से दोनों पार्टियों के पार्षदों के बीच वैचारिक जंग होनी चाहिए थी, लेकिन यहाँ नजारा कुछ और ही है। ‘रिश्तों में चार चांद’ लगाने की ऐसी ही एक कोशिश कल तब भारी पड़ गई, जब एक भाजपा पार्षद के जन्मदिन पर कांग्रेस के दिग्गजों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और केक कटवाया।
अपनों की भड़ास और ‘इस्तीफा’ कांड :-
यह ‘केक’ कांग्रेस के उन कर्मठ कार्यकर्ताओं को रास नहीं आया, जो विपक्ष की मार झेलकर भी पार्टी के लिए जमीन पर लड़ते रहे। सोशल मीडिया से लेकर गलियारों तक कांग्रेसियों ने अपनी भड़ास निकाली। मामला इतना बढ़ा कि देर शाम एक निष्ठावान कांग्रेसी ने ‘अपने-पराए’ के इस खेल से तंग आकर अपना इस्तीफा पार्टी को सौंप दिया।
भाजपा पार्षदों में दो विचारधारा:- ‘आत्मसम्मान’ बनाम ‘समझौता’
दिलचस्प बात यह है कि भाजपा के खेमे में भी सब कुछ ठीक नहीं है। जहाँ कुछ पार्षद इस ‘दोस्ती’ के रंग में रंगे हैं, वहीं कुछ ‘आत्मसम्मानी’ पार्षद आज भी कांग्रेस से झुकने को तैयार नहीं हैं। चर्चा है कि गड़बड़ी फैलाने के लिए एक नए चेहरे ने काफी हद तक एकता में सेंध लगाया हैं। जिसकी चर्चा पार्टी में जमकर हो रही है !
कांग्रेस सूत्रों की माने तो आज कांग्रेस की बैठक में इस पर बावाली चर्चा होनी है