बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में शासन की ‘सामाजिक सुरक्षा योजना’ के तहत मिलने वाली मुआवजा राशि में एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। सर्पदंश (सांप काटने) और जहरीले जीवों के हमले से हुई मौतों के नाम पर बिचौलियों ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर लाखों रुपये की सरकारी राशि का गबन किया है।
विधानसभा में गूंजा मुद्दा, फिर खुली पोल:-
इस पूरे घोटाले का पर्दाफाश तब हुआ जब छत्तीसगढ़ विधानसभा में माननीय सदस्य श्री सुशांत शुक्ला द्वारा तारांकित प्रश्न (क्रमांक 1188) उठाया गया। उन्होंने सर्पदंश से हुई मौतों के मुआवजे में बिचौलियों की संलिप्तता की शिकायत की थी। इसके बाद कलेक्टर कार्यालय ने वर्ष 2022 से जनवरी 2025 तक वितरित किए गए 431 प्रकरणों की प्रारंभिक जांच कराई, जिसमें से 17 मामले प्रथम दृष्टया संदेहास्पद पाए गए।
फर्जीवाड़े का ‘तरीका’:- कहीं कैंसर तो कहीं हार्ट अटैक को बताया ‘सर्पदंश’ जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। बिचौलियों ने न केवल असली मृतकों के नाम-पता बदलकर कूट रचित (फर्जी) दस्तावेज तैयार किए, बल्कि प्राकृतिक मौतों को भी सांप काटने से हुई मौत बता दिया।
कैंसर की मौत पर मुआवजा:- मृतिका शशि पाठक की मृत्यु साल 2020 में कैंसर से हुई थी। बिचौलिये महेंद्र कुमार मनहर ने इसे सर्पदंश का मामला बनाकर ₹4 लाख स्वीकृत कराए और खुद ₹3 लाख “फीस” के नाम पर डकार लिए।
हार्ट अटैक और बीमारी को बनाया हथियार:- पवन यादव और फागुराम प्रजापति जैसे मामलों में परिजनों ने स्वीकार किया कि मौत हार्ट अटैक या गिरने से हुई थी, लेकिन कागजों में उन्हें सांप काटने का शिकार दिखाया गया।
विमलेश कैवर्त और गोरेलाल सिंह के मामलों में तो आवेदकों का कोई सुराग ही नहीं मिला या मौत बीमारी और वृद्धावस्था के कारण पाई गई।
करेंट लगने से मौत, पर कागजों में ‘सांप’:- निर्मला धृतलहरे की माता की मृत्यु बिजली का झटका लगने से हुई थी। वकील ने झांसा देकर ₹4 लाख का मुआवजा दिलाया और उसमें से ₹2 लाख नकद ले लिए।
ब्रेन स्ट्रोक को भी नहीं छोड़ा:- गुंजमती साहू की मृत्यु ब्रेन स्ट्रोक से हुई थी। उनके पड़ोसी ने नगर निगम से सहायता दिलाने के नाम पर दस्तावेज लिए और फर्जी प्रकरण तैयार कर दिया।
इन थानों में दर्ज होंगे मामले:-
SSP कार्यालय द्वारा जारी सूची के अनुसार, फर्जीवाड़े के ये 17 मामले निम्नलिखित थानों के अंतर्गत आते हैं जहां कोनी: 3 प्रकरण, सिटी कोतवाली: 2 प्रकरण,तोरवा: 2 प्रकरण,सिविल लाईन: 3 प्रकरण
सरकण्डा: 6 प्रकरण वही सिरगिट्टी में 1 प्रकरण
सख्त निर्देश:- एक सप्ताह में हो कार्यवाही
तहसीलदार की जांच रिपोर्ट और मर्ग डायरी का सूक्ष्म अवलोकन कर, फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने वाले आवेदकों और बिचौलियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए। पुलिस अब उन बिचौलियों और वकीलों की तलाश कर रही है जिन्होंने भोले-भाले ग्रामीणों के बैंक खाते खुलवाकर मुआवजे की बड़ी राशि खुद हड़प ली।